जंग से पहले ही जश्न, हथियार भी हैं या जोश से ही लड़ेंगे ?

बेहतरीन और पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं के हथियार नहीं होंगे तो मच सकती है विकसित देशों से भी ज्यादा तबाही

Update: 2020-04-06 02:48 GMT

- महज राष्ट्रवाद और एकजुटता के जोश से नहीं जीती सकती यह जंग

- दुनिया के सुपर पावर देश भी कर रहे हैं त्राहि माम्

- बेहतरीन और पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं के हथियार नहीं होंगे तो मच सकती है विकसित देशों से भी ज्यादा तबाही

- WHO समेत दुनिया भर के संगठन बार बार कर रहे भारत को आसन्न तबाही के लिए आगाह

कोरोना से होने वाली जंग में सरकारी खामियां और इसके फैलने में हुई भयंकर सरकारी चूकों से ध्यान हटाकर एक महामारी को भी राष्ट्रवाद और हिन्दू-मुस्लिम से जोड़कर जश्न में बदल देने के मोदी के हुनर की तारीफ तो हर कोई करेगा .... मगर महामारी में दीवाली मना लेने को उपलब्धि मानते समय हम सभी को यह ध्यान भी रखना होगा कि इस वक्त दुनिया के कई और देशों में मौत का तांडव और भारी आर्थिक तबाही भी इसी महामारी ने मचा रखी है ....

भारत में महामारी के फैलने की शुरुआत में हमने जो यह जश्न मनाया है, यह जश्न इसी तरह यूं ही चलता रहेगा और एकजुटता भी इसी तरह बनी रहेगी बशर्ते कोरोना से जंग में मोदी के नेतृत्व में भारत की जनता और अर्थव्यवस्था अमेरिका, इटली, ईरान, चीन, स्पेन जैसे देशों जैसी दुर्दशा में पहुंचने से बच जाए। हालांकि महामारी के फैलने के बाद मोदी के नेतृत्व में देश में अमेरिका, इटली, स्पेन, ईरान या चीन जैसा नुकसान नहीं होगा, इसकी उम्मीद अपने देश की स्वास्थ्य सुविधाओं के आंकड़ें तो कम से कम नहीं ही जगा पा रहे।

क्योंकि जहां बाकी दुनिया ने इस महामारी के फैलने के बाद अपने यहां लाखों की तादाद में टेस्ट किये हैं, सैनिटाइजर/मास्क/ ग्लव्स, डॉक्टरों के लिए सुरक्षा किट, आइसोलेशन वार्ड, वेंटीलेटर, बेड, अस्पताल आदि की कमी नहीं पड़नी दी है...फिर भी वहां के हाल इतने खराब हैं कि अब तो वहां वे लोग खुद ही सब कुछ तबाह हो जाने के डर से त्राहि माम् कर रहे हैं। इटली में जहां डॉक्टरों के पास पर्याप्त सुरक्षा सूट हैं, वहां भी अब तक लगभग 12 हजार डॉक्टर इस महामारी की चपेट में आ चुके हैं और 86 मर भी चुके हैं।

दुनिया की सबसे उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं अपनी जनता को देने के बाद भी अमेरिका और इटली में तो लगभग रोज ही पांच सौ / हजार आदमी मर रहे हैं। जबकि वहां की आबादी भी भारत के मुकाबले कुछ भी नहीं है। उन देशों में एक लाख से कम आबादी के कोरोना के शिकार होने पर ही वहां भारी तबाही दिख रही है।

यहां तो सवा सौ करोड़ लोगों की आबादी है और एक-दो लाख क्या, अगर कोरोना फैला तो न जाने कितने लोग यहां इससे संक्रमित हो सकते हैं। और हमारा देश तो लचर और अपर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण इतना लाचार है कि हम उनकी तरह इस बीमारी के लाखों टेस्ट हर सप्ताह तो क्या महीनों में भी नहीं कर पाएंगे। इसलिए हमें तो शायद यही न पता चल पाए कि कितने हजार या लाख कोरोना बम यहां हमारे देश में कहाँ कहाँ घूम रहे हैं.... और अपने जरिये कितने और लाख लोगों को संक्रमित भी कर रहे हैं...

यही नहीं, दिल को तसल्ली रखने के लिए एक बार को अगर यह भी मान लेते हैं कि उनकी कम आबादी के विपरीत ज्यादा आबादी होने के बावजूद हमारे यहां महज एक लाख लोग ही संक्रमित होंगे ....तो भी तो उनकी तरह हम अपने यहां इतने ही बीमार लोगों के लिये पर्याप्त इंतजाम करने में परेशान होने लगेंगे। जिस तरह के हालात हैं, उससे तो लगता है कि हमारे यहां के डॉक्टर/अस्पताल/ स्वास्थ्य सुविधाएं महज उतने ही लोगों के संक्रमित होने में चरमराने लगेंगी, जितने इटली जैसे छोटे देश में हो चुके हैं।

भारत की सवा सौ करोड़ की विशाल आबादी और इसके अनुपात में अपर्याप्त एवं लचर स्वास्थ्य सुविधाओं को देख कर ही तो बार-बार दुनियाभर के विशेषज्ञ और खुद भारत में मीडिया या सोशल मीडिया पर तमाम लोग सरकार से बार-बार यह अनुरोध कर रहे हैं कि वह इस जंग से लड़ने के लिए जल्द से जल्द स्वास्थ्य सुविधाओं पर ही पूरा ध्यान दे। साथ ही, आंकड़ों के जरिये देश की जनता को यह आश्वस्त भी करे कि यहां तैयारियां हर परिस्थिति को ध्यान में रखकर की जा रही हैं। भले ही हमने तैयारी देर से शुरू की हो मगर अभी भी अगर सरकार कमर कस ले तो इस जंग को लड़कर भी जीता जा सकेगा।

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