संसद की अनुमति के बिना ही सालों से EVM से हो रहे हैं चुनाव, सुप्रीम कोर्ट मामले में सुनवाई को तैयार

देश में जब भी चुनाव नजदीक आते हैं तब ईवीएम को लेकर चर्चा शुरू हो जाती है. कई राजनीतिक दल ईवीएम को लेकर यह दावा भी कर चुके हैं कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है और देशभर के विभिन्न राजनीतिक दल केंद्र की बीजेपी और मोदी सरकार पर ईवीएम को हैक करने के आरोप लगाते रहे हैं.;

Update: 2022-01-19 12:14 GMT

नई दिल्ली: देश में जब भी चुनाव नजदीक आते हैं तब ईवीएम को लेकर चर्चा शुरू हो जाती है. कई राजनीतिक दल ईवीएम को लेकर यह दावा भी कर चुके हैं कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है और देशभर के विभिन्न राजनीतिक दल केंद्र की बीजेपी और मोदी सरकार पर ईवीएम को हैक करने के आरोप लगाते रहे हैं. सोशल मीडिया पर कई वीडियो भी वायरल होते रहे हैं कि बटन कोई भी दबाओ लेकिन वोट किसी एक पार्टी को ही पड़ता था. हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो की विश्वसनीयता भी सवालों के घेरे में है. अब वकील मनोहर लाल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में ईवीएम से मतदान के खिलाफ याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की है. इस पर सीजेआई एन वी रमण ने कहा कि क्या उनको अब ईवीएम मशीन से दिक्कत है?हालांकि सुप्रीम कोर्ट बुधवार को जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 61ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली जनहित सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर विचार करने को लेकर सहमत हो गया है.

61ए के तहत ईवीएम से हो रहे हैं चुनाव

वकील एमएल शर्मा ने याचिका में कहा कि जन प्रतिनिधित्व कानून के 61ए प्रावधान के तहत ही देश में चुनाव में मतपत्र की बजाय इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से मतदान की शुरुआत हुई थी. प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने अधिवक्ता एमएल शर्मा की दलीलें सुनीं और कहा कि वह उनके मामले को सूचीबद्ध करने पर विचार करेंगे. शर्मा ने ही यह याचिका व्यक्तिगत रूप से दायर की है.

ईवीएम से चुनाव कराए जाने को नहीं मिली संसद से अनुमति

उन्होंने अपनी याचिका में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 61(a) को चुनौती देते हुए कहा है कि ईवीएम से चुनाव कराए जाने को लेकर अब तक संसद से अनुमति नहीं मिली है या कहें कि संसद ने पारित नहीं किया था इसलिए इस प्रावधान को लागू नहीं किया जा सकता और ईवीएम से हुए चुनाव को रद्द किया जाए और आगामी विधानसभा चुनाव को भी बैलेट पेपर से कराया जाए.

राजनीतिकदल भी ईवीएम पर उठाते रहे हैं सवाल

कई राजनीतिक दल भी ईवीएम की जगह मतपत्र से चुनाव की मांग उठाते रहे हैं औऱ ईवीएम में धोखाधड़ी की संभावना जताते रहे हैं. इसी को देखते हुए चुनाव आयोग को ईवीएम के साथ वीवीपैट मशीन जोड़ना पड़ा था.

हालांकि इस बात की जानकारी नहीं मिल सकी है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कब करेगा लेकिन आने वाले कुछ ही दिनों में 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं औऱ अगर सुप्रीम कोर्ट उससे पहले सुनवाई करता है और ईवीएम की जगह वोटिंग के लिए किसी औऱ माध्यम पर विचार करने के लिए कहता है तो क्या इन राज्यों के चुनाव आगे बढ़ाए जाएंगे?

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