डॉ कुमार विश्वास का जन्मदिन आज, कुमार के विश्वास ने युवाओं को 'कविता' से मोहब्बत सिखा दी
श्रृंगार रस की कविताओं में मर्यादा का आंचल डालकर उसे खूबसूरत आकार में ढालने वाले कवि कुमार विश्वास के बारे में आइए जानते हैं कुछ खास बातें;
नई पीढ़ी के लोकप्रिय हिंदी कवि डॉ. कुमार विश्वास (Dr. Kumar Vishwas)का जन्मदिन है, 10 February 1970 को जन्मे कुमार अब 51 वर्ष के हो गये है. युवाओं के बीच गायब हो चुके कविताओं के शौक को वापस जिंदा करने वाले आज के सबसे चर्चित कवियों और प्रस्तोता में से एक डॉ कुमार विश्वास ने कविता को एक नए सांचे में ढाला है, जिसने केवल प्रेम की खुशबू समाज में फैलाई है। उनकी कविताओं को युवा हमेशा गुनगुनाते रहते है ,इस बात का जीता-जागता उदाहरण ये है कि आज कुमार विश्वास की काव्य गोष्ठी में युवाओं की संख्या काफी ज्यादा होती है।
श्रृंगार रस की कविताओं में मर्यादा का आंचल डालकर उसे खूबसूरत आकार में ढालने वाले कवि कुमार विश्वास के बारे में आइए जानते हैं कुछ खास बातें
कुमार विश्वास का जन्म 10 फ़रवरी 1970 को पिलखुआ, (ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश) में हुआ था। कुमार विश्वास ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा लाला गंगा सहाय विद्यालय, पिलखुआ से प्राप्त की। उनके पिता डॉ॰ चन्द्रपाल शर्मा, आर एस एस डिग्री कॉलेज (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से सम्बद्ध), पिलखुआ में प्रवक्ता रहे। उनकी माता श्रीमती रमा शर्मा गृहिणी हैं। राजपूताना रेजिमेंट इंटर कॉलेज से बारहवीं में उनके उत्तीर्ण होने के बाद उनके पिता उन्हें इंजीनियर बनाना चाहते थे। लेकिन साहित्य प्रेमी और शब्दों के जादूगर कुमार विश्वास का मन इंजीनियर बनने को नहीं था, बस इसलिए उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी।
इसके बाद उन्होंने स्नातक और फिर हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर किया, जिसमें उन्होंने स्वर्ण-पदक प्राप्त किया। इसके बाद इन्होंने 'कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना' विषय पर पीएचडी की। उनके इस शोध-कार्य को 2001 में पुरस्कृत भी किया गया। कुमार विश्वास ने अपना करियर राजस्थान में प्रवक्ता के रूप में 1994 मे शुरू किया था। कुमार विश्वास की दो पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं- 'इक पगली लड़की के बिन' (1996) और 'कोई दीवाना कहता है' (2007 और 2010 दो संस्करण में) हिन्दी गीतकार 'नीरज' जी ने उन्हें 'निशा-नियामक' की संज्ञा दी है।
कुमार ने अन्ना आंदोलन में अहम भूमिका निभाई, मंच पर भीड़ बढाने का काम कुमार की कविताएँ बखूबी निभाया करती थी। उसके बाद दिल्ली में केजरीवाल सरकार को दो बार मौका दिलाने में भी कुमार विश्वास की अहम भूमिका थी। उसके बाद उन्हें राजनीत से मोहभंग हुआ तो उन्होंने मुड़कर पीछे नहीं देखा।