ये भारत की हकीकत जब थककर मासूम सो गया, लेकिन ममता ने हार नहीं मानी, देखें वीडियो

सबसे बड़ा सवाल यह है कि बाहर से आ रहे इन मजदूरों में अगर कोई कोरोना पॉजिटिव हुआ तो इनकी वजह से जो संक्रमण फैलेगा, उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

Update: 2020-05-14 09:06 GMT

एक ओर जहां सरकारें लगातार मजदूरों को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही हैं, वहीं जमीनी हकीकत दावों के बिलकुट उलट है। कोरोना वायरस के खतरे के बीच दूसरे राज्यों से अपने घरों की ओर लौट रहे प्रवासी मजदूरों की भावुक कर देने वाली तस्वीरें सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। ताजा तस्वीर आगरा से सामने आई है, जहां पंजाब से उत्तर प्रदेश के महोबा जाने के लिए निकले एक जत्थे में शामिल बच्चा इतना थक गया कि वह चलते हुए ट्रॉली बैग पर ही सो गया।

मजदूरों का कहना था कि वे पंजाब से पैदल निकले हैं, और किसी सरकारी सुविधा के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। रास्ते में अगर कुछ खाने को मिल जाता है तो खा लेते हैं, और जब रात हो जाती है, तो जहां होते हैं वहीं रुक जाते हैं। मजदूरों के मुताबिक, उनसे रास्ते में कई बार पूछताछ हुई लेकिन किसी ने उनके घर जाने को लेकर कोई व्यवस्था नहीं की। आपको बता दें कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने मजदूरों से अपील की थी कि वे जहां हैं, वहीं रहें, उन्हें वापस लाने की व्यवस्था की जाएगी। इस मामले में हमने आगरा के एसपी सिटी से बात करने की कोशिश की लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई।

अपने घरों को जाने के लिए निकले ये मजदूर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से होते हुए पैदल चल रहे हैं। एक ओर जहां सरकार इनकी घर वापसी को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है वहीं दूसरी ओर इन मजदूरों को लेकर प्रशासन का रवैया बेहद गैरजिम्मेदाराना दिख रहा है। विभिन्न चौराहों-सीमाओं पर पुलिस का पहरा है, क्या उन पुलिसवालों की नजर इन मजदूरों पर नहीं पड़ती? वे पुलिसवाले आखिर क्यों जिला प्रशासन से बात करके इन्हें किसी शेल्टर होम में रोककर इनके घर जाने की व्यवस्था नहीं कराते? और सबसे बड़ा सवाल यह है कि बाहर से आ रहे इन मजदूरों में अगर कोई कोरोना पॉजिटिव हुआ तो इनकी वजह से जो संक्रमण फैलेगा, उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

इस वीडियो को यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शेयर किया है. 


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