ग्रेटर नोएडा की सीईओ रितु महेश्वरी को एक महीने की सजा, गिरफ्तारी का वारंट जारी

नोएडा अथॉरिटी की सीईओ ऋतु माहेश्वरी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है।

Update: 2023-01-08 06:20 GMT

नोएडा (धीरेन्द्र अवाना) : करीब 18 साल से चल रहे एक मामले में आदेशों की अवहेलना करने पर जिला उपभोक्ता फोरम ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी रितु माहेश्वरी (Ritu Maheshwari) को गिरफ्तार करने के लिए वारंट जारी किया है।जिसमें उन्हें एक महीने के लिए जेल भेजने के आदेश दिये है।जिसके बाद प्राधिकरण के अधिकारी दहशत में है।ये कोई पहला मामला नही है इससे पहले भी रितु माहेश्वरी को अवमानना के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया था।

आपको बता दे कि महेश मित्रा नाम के व्यक्ति ने 2001 में जमीन के एक प्लॉट के आवंटन के लिए आवेदन किया था।ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण ने मित्रा को जमीन आवंटित नहीं की, जिसके बाद मित्रा ने याचिका दायर की थी। 2005 में जिला उपभोक्ता फोरम में मामला गया और 18 दिसंबर 2006 को जिला फोरम ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया। जिला उपभोक्ता फोरम ने जीएनआईडीए को आदेश दिया कि मित्रा को उसकी आवश्यकता के अनुसार 1,000 से 2,500 वर्ग मीटर के बीच का प्लॉट आवंटित किया जाए, जिस पर जीएनआईडीए के नियम और शर्तें लागू रहेंगी। इसके अलावा ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण को भी मामले की पूरी कानूनी फीस अदा करने का आदेश दिया था। जिसके बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने राज्य उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा सुनाए गए आदेश के खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की।

21 दिसंबर 2010 को राज्य उपभोक्ता आयोग ने इस अपील पर फैसला सुनाया। राज्य आयोग ने फैसला सुनाया कि मित्रा द्वारा विकास प्राधिकरण के पास जमा की गई 20,000 रुपये की पंजीकरण राशि वापस कर दी जाएगी। यह राशि 6 जनवरी, 2001 को जमा की गई थी और 6 प्रतिशत ब्याज भी 6 जनवरी, 2001 से भुगतान की तिथि तक देना होगा। राज्य आयोग के इस फैसले से विकास प्राधिकरण को बड़ी राहत मिली है।वही दूसरी तरफ मित्रा ने राज्य उपभोक्ता आयोग के इस आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। पूरे मामले को सुनने के बाद राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने 30 मई 2014 को अपना फैसला सुनाया।

राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने कहा कि मामले को लेकर मित्रा की स्थिति सही थी और राज्य उपभोक्ता आयोग का फैसला गलत था।जिला उपभोक्ता फोरम का फैसला सही है। हालाँकि, राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा घोषित निर्णय में मामूली बदलाव किया। राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में कहा कि मित्रा को 500 से 2500 वर्ग मीटर के बीच कोई भी भूखंड आवंटित किया जा सकता है। यह उनकी परियोजना रिपोर्ट और आवश्यकता के आधार पर तय किया जाएगा।जीएनआईडीए ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के उस फैसले को लागू नहीं किया जिसके खिलाफ मित्रा ने एक बार फिर जिला उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया।जिला उपभोक्ता फोरम ने कई बार जीएनआईडीए को राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के निर्णय का अनुपालन करने का निर्देश दिया है।

मामले को गंभीरता से लेते हुये जिला उपभोक्ता फोरम ने 14 जुलाई 2017 को जीएनआईडीए के बैंक खातों को कुर्क कर दिया। इस कार्रवाई का विरोध करते हुए ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की।इसके बाद राज्य आयोग ने जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा घोषित फैसले को रद्द कर दिया। जिला उपभोक्ता फोरम ने 18 अगस्त 2017 को ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ को व्यक्तिगत रूप से फोरम के समक्ष पेश होने का आदेश दिया था।इस आदेश के विरुद्ध भी प्राधिकरण ने राज्य उपभोक्ता आयोग से निरस्तीकरण आदेश प्राप्त किया।

वही जिला उपभोक्ता फोरम ने शनिवार को पारित अदालती फैसले में कहा है कि पिछले 9 साल से ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण जिला फोरम और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के आदेशों में देरी कर रहा है।जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और फोरम के सदस्य दयाशंकर पांडेय ने शनिवार को पूरे मामले की सुनवाई करते हुए नया आदेश पारित किया है जिसमें जीएनआईडीए के सीईओ को एक माह की जेल की सजा सुनाई गई है। उस पर 2,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है और सीईओ को गिरफ्तार करने के लिए गौतमबुद्ध नगर पुलिस आयुक्त को वारंट भेजा गया है।जिला फोरम की ओर से सीईओ को अगले 15 दिनों में राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के आदेश का पालन करने का निर्देश दिया गया है।

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