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कविता : धृतराष्ट्र

कविता : धृतराष्ट्र

आज के युग में ,कौन है धृतराष्ट्र ?

17 July 2021 3:27 PM IST
आभासी यथार्थ के दौर में भारतीय पत्रकारिता

आभासी यथार्थ के दौर में भारतीय पत्रकारिता

मुशर्रफ़ अली मैं यथार्थ हूँ, मुझे पकड़कर, छूकर देखा, महसूस किया जा सकता है लेकिन आईने में नज़र आ रही मेरी छवि को छुआ या पकड़ा नही जा सकता। यह आभासी यथार्थ है। आइने के सामने से हटते ही मेरा वजूद तो...

17 July 2021 1:15 PM IST