ऐसा शायर जिसने खून थूका है :
जौन उठता है यूँ कहो यानी, मीर ओ ग़ालिब का यार उठता है!!;
बज़्म से जब निगार उठता है
मेरे दिल से ग़ुबार उठता है...!!
जौन उठता है यूँ कहो यानी
मीर ओ ग़ालिब का यार उठता है!!
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उम्र भर अपनी आरज़ू की है
मर न जाऊँ विसाल पे अपने...
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दुनिया तबाह करके होश आ गया है दिल को
अब तो हमारी सुन लो अब हम सुधर चले हैं...
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यूँ तो हम दम-ब-दम ज़मीं पे रहे
उम्र सब आसमान में गुज़री
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हम ने लिक्खा निसाब-ए-तीरा-शबी
और ब-सद आब-ओ-ताब ही लिक्खा
मुंशियान-ए-शुहूद ने ता-हाल
ज़िक्र-ए-ग़ैब-ओ-हिजाब ही लिक्खा
न रखा हम ने बेश-ओ-कम का ख़याल
शौक़ को बे-हिसाब ही लिक्खा
दोस्तो हम ने अपना हाल उसे
जब भी लिक्खा ख़राब ही लिक्खा...
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नवाएं, निकहतें, आसुदा चेहरे, दिलनशी रिश्ते
मगर इक शख़्स इस माहौल में क्या सोचता होगा !!
~ जौन एलिया