पूर्वांचल में बाढ़ का कहर: वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर और बलिया में गंगा खतरे के निशान के पार

मुख्यमंत्री ने बाढ़ से जनहानि एवं पशु हानि को प्रत्येक दशा में रोकने के निर्देश देते हुए कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बाढ़ राहत शिविरों में पहुंचाया जाए

Update: 2019-09-18 09:00 GMT

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंगाऔर यमुना  नदी में बाढ़ को देखते हुए प्रयागराजऔर वाराणसी  के अधिकारियों को पूरी चौकसी बरतने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए सभी प्रबन्ध सुनिश्चित करते हुए बाढ़ चौकियों को सक्रिय किया जाए. उन्होंने सम्बन्धित मण्डलायुक्त और जिलाधिकारी सहित स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों को बाढ़ के मद्देनजर सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.

मुख्यमंत्री ने बाढ़ से जनहानि एवं पशु हानि को प्रत्येक दशा में रोकने के निर्देश देते हुए कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बाढ़ राहत शिविरों में पहुंचाया जाए. बाढ़ पीड़ितों को हर सम्भव राहत और मदद उपलब्ध करायी जाए. उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में बन्धों की लगातार निगरानी करें. उन्होंने कहा कि बन्धों का निरन्तर निरीक्षण सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी आपात स्थिति सें प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

संगम नगरी प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों में आई बाढ़ के पानी ने हाहाकार मचा दिया है. गंगा नदी जहां खतरे के निशान को पार कर गई है. वहीं यमुना नदी भी खतरे के निशान को छूने के करीब है. हालात से निपटने के लिए अब सेना की मदद लेने का फैसला किया गया है. इसके साथ ही बाढ़ में फंसे हुए हज़ारों लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के लिए एयरफोर्स से हेलीकॉप्टर की मदद मांगी गई है.

सबसे ज्यादा खतरा वाराणसी, चंदौली, बलिया और गाजीपुर जिले के लोगों को सता रहा है। क्योंकि यहां गंगा ने खतरे का निशान पार कर लिया है। वाराणसी में गंगा का जलस्तर 71.30 मीटर है। यहां, खतरे के निशान 71.26 मीटर को पार कर लिया है। जलस्तर 1 घंटा प्रति सेमी बढ़ रहा है। 28 से अधिक गांव डूबे हैं। वरुणा पार इलाके के लोग पलायन करने को मजबूर हैं।

वाराणसी में वर्ष 2013 के बाद यह पहला मौका है, जब गंगा ने वाराणसी में खतरा बिंदु को पार कर लिया है। इस लिहाज से गंगा इस समय खतरे के निशान से 19 सेंटीमीटर ऊपर हैं और प्रति घंटे गंगा में बढ़ाव की गति एक सेंटीमीटर है। अगर अगले चौबीस घंटों तक यह गति जारी रही तो कई अन्य कालोनियों में भी गंगा का पानी भर जाएगा और स्थिति काफी भयावह हो जाएगी। गंगा खतरे के निशान को पार करके बह रही है। 1978 की बाढ़ में अधिकतम जलस्तर 73.901 मीटर रहा था।

चंदौली जिले में बाढ़ केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा का खतरे का निशान 71.26 मीटर है। बुधवार दोपहर तर गंगा का जलस्तर जलस्तर 71.34 मीटर तक पहुंच गया।, यानी कि गंगा ने खतरे का निशान पार कर लिया है। वहीं अभी भी एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से गंगा का जल स्तर बढ़ रहा है। पड़ाव संवाददाता के अनुसार गंगा का पानी गांव में सिवान से होते हुए घरों तक पहुंच गई है।

इससे लोग सुरक्षित आशियाने की तलाश में जुट गए हैं। क्षेत्र के बहादुरपुर, रतनपुर, मढिया, जलीलपुर, सूजाबाद, डोमरी, कूंडा आदि गांवों में घरों तक पानी पहुंच गया है। पड़ाव, धानापुर, चहनियां के करीब 6 गांव में बाढ़ का पानी घुस गया है। जिले में 42 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। प्रभावित क्षेत्रों में 150 नावें तैनात प्रशासन ने की हैं। कलेक्ट्रेट से भी निगरानी हो रही है।

भदोही जिले में गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही बढोत्तरी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी है। तटवर्ती गांवों में गंगा का पानी पहुंच गया है। कोनिया क्षेत्र के दर्जन भर से अधिक गावों में 500 बीघे फसल पानी में डूब गई है। दो दिनों में छेछुआ-भुर्रा में एक बिस्वा जमीन कटान की भेंट चढ़ गई। दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर बढ़ रहा है।

सीतामढ़ी में खतरा का कोई निशान नहीं है लेकिन 80 मीटर के ऊपर खतरा के निशान के ऊपर माना जाता है। हालांकि अब तक 79.65 मीटर तक जलस्तर पहुंचा है। 2013 में 81 मीटर से अधिक जलस्तर जाने से हाहाकार मच गया था।

मिर्जापुर जिले में गंगा खतरे के निशान के करीब पहुंच रही है। बुधवार सुबह 77. 230 मीटर जलस्तर रिकार्ड किया गया। जिले में खतरे का निशान 77. 724 मीटर निर्धारित है। इस समय जिले के 495 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं।

गाजीपुर में बाढ़ का खतरा अब भी जारी है। गंगा के लाल निशान (63.10 मीटर) से ऊपर बहने से रामगढ़ क्षेत्र के हजारों लोग पलायन कर उंची जगहों पर चले गए हैं। अभी गंगा का जलस्तर 64.15 मीटर है।

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