हाथरस कांड में सीबीआई जांच में आई पहले ही दिन बड़ी चूक सामने, कैसे होगी आगे जांच!

इतने बड़े केस में सबूतों के साथ इतनी बड़ी लापरवाही किस और इशारा करती है.

Update: 2020-10-15 09:09 GMT

हाथरस। हाथरस दुष्कर्म और हत्या मामले की सीबीआई जांच की शुरुआत में ही बाधा आ गई। जांचकतार्ओं ने पाया कि जिस दिन पीड़िता को अस्पताल लाया गया था, उस दिन यानी 14 सितंबर की अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज गायब है। हाथरस के जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक इंद्र वीर सिंह ने कहा कि अगर पुलिस ने उनसे कहा होता तो वह अस्पताल फुटेज को सुरक्षित रख लेते।

उन्होंने कहा, पुराने फुटेज को हर सात दिन में डिलीट कर दिया जाता है और नए फुटेज को इस पर रिकॉर्ड कर लिया जाता है। जब तक विशेष रूप से कहा नहीं जाता है, हम बैक-अप नहीं रखते हैं। पीड़िता को घटना के बाद इलाज के लिए सबसे पहले जिला अस्पताल ले जाया गया था और फुटेज में उसकी हालत के बारे में महत्वपूर्ण सबूत मिलने की संभावना थी, कि कथित तौर पर हमले के बाद उसकी हालत क्या थी।

डॉक्टरों के बयान दर्ज करने और सबूतों की जांच करने के लिए सीबीआई की टीम अस्पताल गई थी। सीबीआई सूत्रों ने कहा कि जब पीड़िता को यहां लाया गया था तब फुटेज से उन्हें पीड़िता की स्थिति का पता लगाने में मदद मिलती कि उसे कब लाया गया था, उसे किसने देखा था और जब वह यहां थी तो उससे किसने बात की थी।

उन्होंने कहा, एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि अस्पताल का अपराध से संबंधित जांच से कुछ लेना देना नहीं है। जब तक अस्पताल में कोई अपराध नहीं होता है या लापरवाही की सूचना नहीं दी जाती है, इस पर आपराधिक जांच का कोई असर नहीं पड़ता है। ये अलग-अलग चीजें हैं। यही वजह है कि सीसीटीवी फुटेज को ध्यान में नहीं रखा गया।

संयोग से हाल फिलहाल में सीबीआई द्वारा जांच की जा रही एक हाई-प्रोफाइल मामले में यह दूसरी घटना है, जब सीसीटीवी फुटेज गायब है, यह चीजें जांच को प्रभावित कर रही हैं। सुशांत सिंह राजपूत मामले में भी मुंबई के कूपर अस्पताल में जहां दिवंगत अभिनेता का पोस्टमार्टम किया गया था, उन्होंने जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज को संरक्षित नहीं किया था।

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