बाबरी विध्वंस केस में फैसला सुनाते ही जज सुरेंद्र कुमार यादव रिटायर

इस केस के 32 आरोपियों पर फैसला लिखने के साथ ही सुरेंद्र कुमार यादव अपने कार्यकाल से भी मुक्त हो गए हैं.

Update: 2020-09-30 08:10 GMT

लखनऊ : बाबरी का विवादित ढांचा ढहाए जाने के मामले में 28 साल बाद आखिरकार फैसला आ गया। लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। लखनऊ में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के जज एसके यादव ने 2000 पन्नों का फैसला देते हुए राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे रहे लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत सभी 32 आरोपियोंं को बरी कर दिया। इस केस में 48 लोगों पर आरोप लगे थे, जिनमें से 16 की मौत हो चुकी है। फैसला सुनाने वाले जज आज ही रिटायर हो रहे हैं।

ये फैसला बाबरी मस्जिद विध्वंस केस से जुड़ा है जिसे 6 दिसंबर 1992 को गिराया गया था. सीबीआई कोर्ट के जज सुरेंद्र कुमार यादव ने 28 साल पुराने इस केस में फैसला सुनाया है और सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया है.

इस केस के 32 आरोपियों पर फैसला लिखने के साथ ही सुरेंद्र कुमार यादव अपने कार्यकाल से भी मुक्त हो गए हैं. आज यानी 30 सितंबर ही सुरेंद्र कुमार यादव के रिटायरमेंट का दिन है. उनके पास शाम 5 बजे तक का ही वक्त है.

हालांकि, सुरेंद्र यादव का कार्यकाल एक साल पहले ही पूरा हो गया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी विध्वंस केस की सुनवाई पूरी करने और इस पर फैसला सुनाने के मकसद से उन्हें एक साल का विस्तार दे दिया था. उनके रिटायरमेंट की तारीख 30 सितंबर 2019 थी.

काफी पुराना रहा है सुरेंद्र कुमार यादव का अयोध्या कनेक्शन

एक और खास बात ये है कि सुरेंद्र कुमार यादव का अयोध्या कनेक्शन काफी पुराना रहा है. उनकी पहली तैनाती अयोध्या में ही हुई थी. साथ ही उनका जन्म भी जौनपुर जिले में हुआ था.

बाबरी विध्वंस 1992 में हुआ था. इससे दो साल पहले 8 जून 1990 को ही सुरेंद्र कुमार यादव ने बतौर मुनसिफ अपनी न्यायिक सेवा की शुरुआत की थी. सुरेंद्र कुमार यादव की पहली नियुक्ति अयोध्या में हुई थी और 1993 तक वो यहां रहे थे.

यानी अयोध्या में जब कारसेवकों और बीजेपी के बड़े नेताओं की मौजूदगी में बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया गया था, उस वक्त सुरेंद्र कुमार यादव की पोस्टिंग भी अयोध्या में ही थी और आज वो मौका आया है जब उन्होंने इस बड़े केस पर बतौर सीबीआई विशेष कोर्ट जज फैसला सुनाया है.

कौन थे 32 आरोपी

लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, महंत नृत्य गोपाल दास, डॉ. राम विलास वेदांती, चंपत राय, महंत धर्मदास, सतीश प्रधान, पवन कुमार पांडेय, लल्लू सिंह, प्रकाश शर्मा, विजय बहादुर सिंह, संतोष दुबे, गांधी यादव, रामजी गुप्ता, ब्रज भूषण शरण सिंह, कमलेश त्रिपाठी, रामचंद्र खत्री, जय भगवान गोयल, ओम प्रकाश पांडेय, अमरनाथ गोयल, जयभान सिंह पवैया, साक्षी महाराज, विनय कुमार राय, नवीन भाई शुक्ला, आरएन श्रीवास्तव, आचार्य धर्मेंद्र देव, सुधीर कुमार कक्कड़ और धर्मेंद्र सिंह गुर्जर।

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