यूपी के पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति गिरफ्तार

अब पुलिस की निगरानी में केजीएमयू में उनका इलाज होगा. अभी उनके सितारे गर्दिश में चलते नजर आ रहे है.

Update: 2020-09-11 17:53 GMT

उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार (Akhilesh Sarkar) के पूर्व काबीना मंत्री गायत्री प्रजापति (Gayatri Prajapati) को आज फिर लखनऊ में गिरफ्तार कर लिया गया है. उनको अभी पिछले सप्ताह में ही हाईकोर्ट से जमानत मिली थी. उसके बाद उन पर रेप पीडिता को करोड़ों रूपये की सम्पत्ति देने का आरोप लगाया गया था. जिसके चलते गौतमपल्ली थाना के दो इंस्पेक्टर भी सस्पेंड किये गये है. उसके बाद जांच में उनकी गिरफ्तारी की गई है.

समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया है. राजधानी के गाजीपुर थाने में गुरुवार को दर्ज हुई एफआइआर में पुलिस ने यह कार्रवाई की है. कोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया. न्यायालय ने पुलिस रिमांड मंजूर कर ली है. अब पुलिस की निगरानी में केजीएमयू में उनका इलाज होगा. अभी उनके सितारे गर्दिश में चलते नजर आ रहे है. 

क्या हुआ पूरा मामला 

समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति (Gayatri Prajapati) के खिलाफ एक और FIR दर्ज करवाई गई है. यह FIR दुष्कर्म की शिकायत करने वाली महिला के पूर्व वकील दिनेश चंद्र त्रिपाठी (Dinesh Chandra Tripathi) की ओर से दर्ज करवाई गई है. FIR में पीड़ित महिला को भी आरोपी बनाया गया है. प्रजापति को 2017 में दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और हाल ही मेडिकल ग्राउंड पर वह दो महीने की जमानत पर बाहर आए हैं. गाजीपुर के SHO ब्रिजेश कुमार सिंह ने कहा कि FIR आपराधिक धमकी और धोखाधड़ी के मामलों में दर्ज कराई गई है.

महिला ने वकील से कहा था पक्ष बदलने को

FIR गाजीपुर पुलिस स्टेशन में गुरुवार को दर्ज कराई गई. त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि मामले को रफा-दफा करने के लिए रेप पीड़िता और आरोपी मंत्री के बीच करोड़ों का लेनदेन हुआ है. त्रिपाठी ने कहा कि शिकायतकर्ता महिला ने उन्हें सामूहिक दुष्कर्म मामले में फरवरी 2019 में प्रजापति और अन्य सहआरोपी के पक्ष में शपथपत्र (Affidavit) दाखिल करने को कहा था और जब उन्होंने विरोध किया तो महिला ने उन्हें गंभीर चेतावनी भुगतने की धमकी दी.

त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि 26 मार्च 2019 को अखबारों में उसके खिलाफ खबर प्रकाशित हुई और उसके बाद मामले के लिए उसने अलग वकील रख लिया. वकील ने आरोप लगाया कि महिला ने मामले में अपना पक्ष बदलने के लिए प्रजापति से पैसे, प्लॉट और घर लिए.

महिला ने वकील के खिलाफ दर्ज करवाया मामला

त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने महिला को उसके व्यवहार को कानून और न्याय की भावना के विपरीत बताया तो महिला ने 19 जून को उनके खिलाफ चित्रकूट (Chitrakoot) में मामला दर्ज करवा दिया. उन्होंने कहा, "पुलिस ने मामले में कुछ भी ठोस नहीं पाया और केस में अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी."

त्रिपाठी ने आरोप लगाया, "प्रजापति के बहकावे में आकर महिला ने फिर गौतमपल्ली पुलिस स्टेशन में 7 जुलाई 2019 को मेरे खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज करवा दिया. उसने अपनी बेटी को भी प्रजापति के पक्ष में करने के लिए उससे आशियाना क्षेत्र में 1.5 करोड़ रुपये का प्लॉट ले लिया."

प्रजापति और महिला ने दी जान से मारने की धमकी

त्रिपाठी ने कहा कि प्रजापति जब जेल में था, तो महिला ने उन्हें प्रजापति से बात करने के लिए कहा. त्रिपाठी ने पुलिस सुरक्षा की मांग करते हुए कहा, "प्रजापति ने मुझे बाहर आने के बाद जान से मारने की धमकी दी थी. महिला ने भी प्रजापति के आदमियों से मुझे मरवाने की धमकी दी है. अब जब मैं घर से बाहर जाता हूं और वापस आता हूं, तो अज्ञात बदमाश मेरा पीछा करते हैं."

बता दें कि गायत्री प्रजापति अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) सरकार में खनन मंत्री रहे चुके हैं. उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में रहने वाली पीड़िता की मां ने इससे दावा किया था कि प्रजापति ने नौकरी और एक घर देने के बहाने उसे लखनऊ बुलाया था और वहां अपने साथियों के साथ उसका दुष्कर्म किया था.

महिला ने कहा था कि आरोपी ने उसकी नाबालिग बेटी के साथ भी दुष्कर्म किया है और इसका एक वीडियो बनाया था. इसके जरिए उसे ब्लैकमेल करता रहता था. गायत्री प्रजापति के खिलाफ केस दर्ज करते हुए उसे गिरफ्तार किया गया था. लेकिन यह मामला उस समय पलट गया जब रेप पीड़िता ने कोर्ट में गायत्री प्रजापति के पक्ष में बयान दे दिए थे.

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