योगी राज में लॉ एंड आर्डर पर लॉक डाउन, कानपुर, गाजियाबाद, गोंडा, गोरखपुर समेत यूपी में अपहरणकर्ताओं के हौसले बुलंद

Lock down on law and order in Yogi Raj;

Update: 2020-07-30 04:50 GMT

लखनऊ: रिहाई मंच ने उत्तर प्रदेश में कानपुर, गोंडा के बाद गोरखपुर में हुए अपहरण और हत्या पर बोला कि योगी जी से उनका गृहजिला नहीं संभल रहा, क्या वे प्रदेश संभाल पाएंगे. एक के बाद एक हुई अपहरण की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए मंच ने प्रदेश सरकार के अपराध पर ज़ीरो टॉलरेंस के दावे को निराधार और झूठा प्रचार बताया. योगी सरकार में पुलिस को बेगुनाहों पर जुल्म ढाने के लिए खुला छोड़ दिया गया है. दूसरी ओर वही पुलिस रसूखदारों और दबंगों की सेवा-टहल करने में लगी है. राजधानी के अलीगंज से भी लखीमपुर खीरी के सुजीत की गुमशुदगी की खबर सामने आ रही है.

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि कानपुर, गोंडा और यहां तक कि मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर में अपहरण की घटनाएं बताती हैं कि अपराधी बेखौफ हैं और सरकार कानून का राज स्थपित करने में नाकाम है. गोंडा से आठ वर्षीय बालक नमो गुप्ता और गोरखपुर से 14 वर्षीय बलराम गुप्ता का दिन दहाड़े अपरहण के दुस्साहस ने बता दिया कि बहन-बेटियों के बाद सूबे में बच्चे तक सुरक्षित नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि कानपुर के संजीत यादव को 22 जून को अपहरणकर्ताओं ने मात्र तीन किलोमीटर के फासले पर रखा था. पुलिस ने संजीत के परिजन की एफआईआर दर्ज करने में तीन दिन लगा दिए. खबरों के अनुसार संजीत के परिजनों से अपहरणकर्ताओं ने 29 जून और 13 जूलाई के बीच फिरौती की रकम के लिए 26 बार फोन किया. पुलिस को इस बात की भी भनक नहीं लगी कि संजीत की तो पहले ही हत्या की जा चुकी है. हद तो यह है कि पुलिस ने फिरौती के लिए परिवार को न केवल तैयार किया बल्कि उसकी रकम भी दिलवा डाली. कानपुर देहात के भोगनीपुर थाना क्षेत्र के बृजेश पाल के अपहरण की सूचनाएं भी आईं हैं. 17 जुलाई को उसके न मिलने के बाद परिजनों को 20 लाख की फिरौती की काल आई. 28 जुलाई को सामने आया कि उसकी भी अपहरणकर्ता ने हत्या कर दी.

मंच महासचिव ने कहा कि 24 जूलाई को गोंडा से नमो गुप्ता और गोरखपुर से बलराम गुप्ता का दिनदहाड़े अपहरणकर्ताओं ने अपहरण कर लिया. इन सभी मामलों में अपहरणकर्ताओं ने फिरौती की रक़म मांगने के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया. इसके बावजूद अपहरणकर्ताओं ने पकड़ में आने से पहले बलराम गुप्ता की भी हत्या कर दी.

नमो गुप्ता के पड़ोसी इस बात से हैरान थे कि शुक्रवार होने की वजह से भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच अपहरण की घटना भीड़वाड़े क्षेत्र में कैसे अंजाम दी गई. नमो गुप्ता को सकुशल अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छुड़ाने में एसटीएफ की टीम कामयाब रही लेकिन यह सवाल अपनी जगह कायम है कि प्रदेश को अपराधमुक्त बनाने के नाम पर सैकड़ो एनकाउंटर का हासिल क्या रहा? 

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