प्रोफेसर इलीना सेन का निधन वंचित वर्ग की अपूर्णीय क्षति
देशभर में भोजन का अधिकार (Right To food) और महिलाओं के उत्थान के लिए संघर्ष करने वाली डॉ. इलीना सेन (Dr Ilina Sen) ने कोलकाता में ली अंतिम सांसें. यूनिवर्सिटी में महिला अध्ययन केंद्रों की स्थापना में निभाई थी अहम भूमिका.;
लखनऊ 11 अगस्त 2020। रिहाई मंच ने प्रोफेसर इलीना सेन के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए वंचित वर्ग की अपूर्णीय क्षति बताया। देश की चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता, जन मुद्दों की लड़ाई लड़ने वाली लेखक डॉ. इलीना सेन (Dr Ilina Sen) का निधन हो गया है. डॉ. इलीना ने कोलकता में बीते रविवार को अंतिम सांसें लीं। वे लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थीं. अपने जन मुद्दों पर किए गए कार्य और आंदोलनों के कारण देशभर में चर्चा में रहने वाली इलीना का छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) से गहरा नाता है। इलीना ने आदिवासी, महिलाओं (Tribals) और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी काम किया. बस्तर में सलवा जुडूम के विरोध में कोर्ट तक जाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं में इलीना भी शामिल रहीं. इसके अलावा देशभर में भोजन का अधिकार (Right To food) और महिलाओं के उत्थान के लिए उन्होंने काम किया।
रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा कि इलीना सेन के पास वह सब कुछ था जो किसी मध्य वर्गीय व्यक्ति के लिए अपने दायरे में रहकर सुखद और चिंतामुक्त जीवन जीने के लिए ज़रूरी माना जाता है। लेकिन उन्होंने देश के सबसे वंचित आदिवासी वर्ग की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनके बीच शिक्षक बन कर रहीं और शिक्षा के प्रचार प्रसार का काम किया। उनके उत्पीड़न के खिलाफ अपने पति विनायक सेन के साथ मिलकर आवाज़ उठाई। उनके अधिकारों के लिए लड़ीं।
श्रीमती सेन ने मज़दूरों के हक हुकूक के लिए आवाज़ बुलंद की। आदिवासी महिलाएं उनमें अपनी बहन, मां और अभिभावक देखती थीं। नारी सशक्तिकरण के लिए जहां सबसे अधिक संघर्ष की ज़रूरत थी वही इलीना सेन का कार्यक्षेत्र था।
जब विनायक सेन को मार्च 2007 में आदिवासियों के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज़ उठाने और रिपोर्ट जारी करने के कारण देशद्रोह का आरोप लगाकर जेल में ठूंस दिया गया और अदालत ने पुलिस की कहानी पर उन्हें उम्र कैद की सज़ा सुना दी उस समय इलीना सेन ने मज़बूती के साथ खड़ी रहीं। उनके असमयिक निधन से एक बड़े वर्ग ने अपना अभिभावक और शुभचिंतक खो दिया। यह वंचित समाज के लिए अपूर्णीय क्षति है।
1995 से 2005 तक डॉ. इलीना के साथ सक्रियता से काम करने वाले पीयूसीएल (PUCL) के नेशनल ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी व फिल्म मेकर अजय टीजी बताते हैं कि डॉ. इलीना छत्तीसगढ़ में लंबे समय तक सक्रिय रहीं. जेएनयू से पढ़ाई करने वाली डॉ. इलीना साल 1983 में ही अपने पति विनायक सेन के साथ छत्तीसगढ़ आ गई थीं. शुरू में उन्होंने धमतरी जिले के नगरी ब्लॉक में टीबी की बीमारी से जुझ रहे आदिवासियों के स्वास्थ्य के लिए काम किया. बाद में वे जन मुक्ति मोर्चा के साथ जुड़ गईं.
राइट टू फूड के लिए आंदोलन
अजय टीजी बताते हैं कि 1995 से इलीना ने देश में राइट टू फूड आंदोलन शुरू किया. इसके लिए उन्होंने 'भूख का विरोध' नारा दिया. इसके साथ ही महिला उत्थान के लिए कई आंदोलन किए. 2005 के बाद उन्होंने सलवा जुडूम के खिलाफ भी लड़ाई लड़ी. अपने अंतिम दिनों में उन्होंने छत्तीसगढ़ की राजनीति पर आधारित 'इनसाइड छत्तीसगढ़' किताब लिखी और उसका प्रकाशन भी करवाया. इससे पहले भी वे कई लघु पुस्तिकाएं लिख चुकी हैं.
यूनिवर्सिटी में महिला अध्ययन केन्द्र की स्थापना
गुरु घासीदास सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डॉ. अनुपमा सक्सेना कहती हैं- डॉ. इलीना ने समाज के वंचित वर्गों को न्याय दिलाने के लिए सारी जिंदगी संघर्ष किया. भारत में नारीवादी आंदोलनों को जिन लोगों के कार्यों और विचारों ने स्वरूप प्रदान किया, उनमें वे सबसे महत्वपूर्ण लोगों में हैं. अकडेमिक और ऐक्टिविस्ट दोनों की भूमिका पूरी ईमानदारी से निभा पाने की उनकी जैसी क्षमता कम लोगों में होती है. विश्वविद्यालयों में महिला अध्ययन केंद्रों की स्थापना में जिन लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी, वह उनके से एक थीं. वे लम्बे समय से कैंसर से पीडि़त थीं. लेकिन अंत समय तक बीमारी से लड़ते हुए भी वे मानसिक रूप से सक्रिय थीं.
पति की रिहाई के लिए काम
अजय टीजी बताते हैं कि छत्तीसगढ़ (पहले संयुक्त मध्यप्रदेश) के दल्ली राजहरा में लौह खान मजदूरों के संगठन छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा व महिला मुक्ति मोर्चा के साथ डॉ. इलीना ने काम किया. इलीना सेन ने 90 के दशक में रूपान्तर नाम की संस्था बनाई और साक्षरता, शिक्षा, स्वास्थ्य, जैविक खेती, ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर बरसों तक काम किया. साल 2010-11 में उनके पति विनायक सेन को नक्सली समर्थक होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. अपने पति की रिहाई के लिए उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ी. इसी दौरान वे कैंसर बीमारी की चपेट में आईं.