स्वामी अग्निवेश का जाना जनांदोलनों की अपूरणीय क्षति

राजीव यादव ने कहा कि ऐसे मृदु भाषी, तर्कशील और कर्मठ योद्धा का चला जाना मानवाधिकार जगत के लिए बड़ी क्षति है जिसकी भरपाई की जिम्मेदारी युवा कंधों पर है।

Update: 2020-09-12 08:38 GMT

लखनऊ 12 सितंबर 2020। रिहाई मंच ने वरिष्ठ मानवाधिकार योद्धा स्वामी अग्निवेश के निधन पर शोक व्यक्त किया है। रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि ऐसे समय में जब देश विषम परिस्‍थितियों से गुज़र रहा है और आपदा को अवसर में तब्दील करते हुए मानवाधिकार और नागरिक अधिकारों के लिए काम करने के लिए ज़मीन तंग की जा रही है, स्वामी अग्निवेश जी का हम सब को छोड़कर जाना और भी दुखद हो जाता है।

उन्होंने कहा कि देश में जब सरकार और सरकार समर्थित गैर सरकारी तत्वों द्वारा मानवाधिकार नेताओं पर होने वाले हमलों के सामने स्वामी जी दीवार की तरह खड़े थे। खुद हमले का शिकार होने के बावजूद जिस तरह उन्होंने इसे चुनौती के तौर पर लिया था वह अपने आप में एक मिसाल है।

मंच महासचिव ने एनएपीएम की संविधान बचाओ यात्रा स्मरण करते हुए कहा कि यात्रा आज़मगढ़ के संजरपुर गांव से होकर गुजरनी थी। स्वामी जी यहीं से यात्रा में शामिल होकर वाराणसी जाने वाले थे। इसी क्रम में संजरपुर गांव के पड़ोस में स्‍थित दाऊदपुर गांव में हाफिज शम्शुद्दीन के घर पर रात्रि विश्राम किया था। उन्होंने कहा कि यात्रा की थकान के बावजूद स्वामी जी ने ग्रामवासियों को सम्बोधित कर उनका दिल जीत लिया था। राजीव यादव ने कहा कि ऐसे मृदु भाषी, तर्कशील और कर्मठ योद्धा का चला जाना मानवाधिकार जगत के लिए बड़ी क्षति है जिसकी भरपाई की जिम्मेदारी युवा कंधों पर है। 

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