कांग्रेस Catch-22 सिचुएशन में फँसी है, जाये तो कहाँ जाये? पूर्व आईएएस सूर्यप्रताप सिंह का सवाल

ऐसी परिस्तिथि में कांग्रेस मोदी को कैसे रोक पायेगी, ये राम जी ही जाने।

Update: 2024-01-08 10:34 GMT

2024 के चुनाव में कांग्रेस 255 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का मन बना रही है जो कांग्रेस के इतिहास में सबसे कम हैं। 2019 के चुनाव में 403 सीटों पर लड़कर 53 पायी थी जो मुख्य रूप से TN, केरल व पंजाब से आयीं थीं। जो इतिहास की सबसे ख़राब परफॉरमेंस थी।

अब 28 दलों का कुनबा जोड़ा है, उसे समेटे रखने में लोहे के चने चबाने पड़ रहे हैं। कांग्रेस की दिक़्क़त ये है कि वह चुनाव जीतने के लिए नहीं बल्कि BJP को हर हाल में हराने के लिए लड़ रही है यानी नेगेटिव सोच के साथ लड़ रही है।उधर गठबंधन के सहयोगियों ने नाक में दम कर रखा है।

तीन राज्यों की हार के बाद जहाँ कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा हुआ है, उसे बनाये रखना भी चुनौती है। राहुल गांधी की न्याय यात्रा, अबकी बार मुख्य रूप से बस-यात्रा है तो लोगों से कितना कनेक्ट हो पायेंगे ये भी सवाल है। और गठबंधन के साथी तभी जुड़ेंगे जब सीटों का बँटवारा हो जाएगा।

चुनाव के समय वोटर को कैसे बूथ तक पहुँचाना है, चुनावी स्ट्रेटेजी बनानी होती है,की जगह यात्रा में सन्तई करने, गले मिलने से, का 2024 में कितना लाभ होगा, ये भी पता नहीं है। यूपी में पिछले चुनाव में 70 सीटों पर लड़कर 1 जीती थी, अमेठी भी हाथ से चली गई थी। बाक़ी अधिकांश पर जमानत ज़ब्त हो गई थी। कांग्रेस को पता है कि यूपी में कोई ज़मीन है नहीं, फिर भी 40 सीटों पर दावा ठोक कर अखिलेश यादव को चिढ़ा रही है।

MP में कमलनाथ हैं नहीं, छत्तीसगढ़ में बघेल व राजस्थान में गहलोत ED की जाँच में उलझे हैं। AAP पार्टी व ममता दीदी से कांग्रेस छतीस का आँकड़ा है, ये भी किसी से छिपा नहीं।मायावती साथ आ नहीं रहीं।

इधर राममंदिर प्राण प्रतिष्ठा गले की फाँस बना हुआ है। कांग्रेस तय ही नहीं कर पा रही है कि जाना है या नहीं। भावी राम लहर ने वैसे ही पूरे INDIA का गला सुखा रखा है।

कांग्रेस के प्रवक्ता तक झूठे अहंकार में फँसे हैं।ऊलजुलूल अग्रेशन दिखा कर TV डिबेट्स में मिट्टी पलित करा रहे हैं, कभी कभी फ्रस्ट्रेशन में गाली गलौंच पर भी उतर आते हैं। BJP प्रवक्ता एक रणनीति के तहत उनका ये स्वरूप दिखाने को उकसाते रहते हैं ताकि INDIA गठबंधन, ‘घमंडिया’ सिद्ध हो जाये।

कांग्रेस के रणनीतिकारों के पास घिसे पिटे आइडियाज के सिवाय कुछ नया है नहीं। सब कुछ राहुल गांधी centric है, जिन्हें ख़ुद आभास नहीं की आगे क्या करना है? जिधर हाँका जाता है, चल पड़ते हैं। हमारे जैसे लोग कुछ परामर्श देते हैं तो कहते हैं कि आप कौन होते हैं? चाटुकारों का धंधा पानी ज़ोरों से चल रहा है।

ऐसी परिस्तिथि में कांग्रेस मोदी को कैसे रोक पायेगी, ये राम जी ही जाने।

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