सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच में फंस गया शिक्षामित्र! | Shiksha Mitra |

सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच में कई ऐसे जजमेंट हैं जिनमें शिक्षामित्र को कुछ भी नहीं सूझ रहा है..!!

Update: 2023-04-23 13:38 GMT

Shiksha Mitra : शिक्षामित्र सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच में फंस गया है ऐसा कहना है शिक्षामित्र अभिषेक कुमार उपाध्याय का, उन्होंने बताया की सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच में कई ऐसे जजमेंट हैं जिनमें शिक्षामित्र को कुछ भी नहीं सूझ रहा है. 

अभिषेक उपाध्याय ने बताया, 25 July 2017 केशिक्षामित्र के मामले में जजमेंट के अनुसार दो महत्वपूर्ण फैसले पहला फैसला कि शिक्षामित्र का समायोजन निरस्त किया जाता है और उसी आदेश में B.Ed प्राथमिक के लिए आहर्ता नहीं रखता है. उत्तर प्रदेश सरकार ने 68500 की भर्ती किया जिसमें केवल बीटीसी को शामिल किया परंतु जब 69000 की भर्ती आई तो इन्होंने 28 जून 2018 के ncte के आदेश पर B.Ed को प्राथमिक में शामिल कर लिया.

अब अब जब सुप्रीम कोर्ट के 25 जुलाई 2017 के आदेश पर b.ed को प्राइमरी से बाहर कर दिया और शिक्षामित्र का समायोजन निरस्त हो गया तो जब भी ऐड बहाल हो गया और 69000 में शामिल हो गया तो आखिर शिक्षामित्र का मामला निरस्त कैसे है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अध्यादेश लाने के बाद ही न्यूट्रलाइज किया जा सकता है यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है

अब 25 जुलाई 2017 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने यह लिखा कि शिक्षामित्र पार्टी नहीं है अतः हम शिक्षामित्र की बात सुनने के लिए बाध्य नहीं परंतु 124000 भोला शुक्ला के केस में जो अपग्रेडेशन का मामला था सुप्रीम कोर्ट गया उसमें शिक्षामित्र पार्टी बन गया दूसरा 69000 भर्ती का मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा उसमें सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में सीधा कहा कि ऐसे शिक्षामित्र जो सहायक अध्यापक के पदों पर काम कर रहे हैं उनको आप डिस्टर्ब नहीं करोगे और 18 नवंबर 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किया कि शिक्षामित्र के मामले में हम सरकार को निर्णय लेने की स्वतंत्रता देते हैं सरकार जैसा चाहे वैसा निर्णय ले और यह मैटर हम सरकार के विवेक पर छोड़ते हैं

25 जुलाई 2017 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा मित्रों को पैराटीचर मारना है ₹38878 की शिवपूजन सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका जो कंटेंट में है उसमें सर का उत्तर प्रदेश सरकार के सचिव माफीनामा लगा दिए हैं और कुछ और समय की मांग कर लिए जबकि कोर्ट का आदेश है कि 38878 रुपए इनको दिया जाए

अभी हाल ही में जन सूचना के द्वारा जब शिक्षामित्रों को पारा टीचर के बारे में जवाब मांगा गया तो जन सूचना अधिकारी ने कहा कि यह पोषणीय नहीं है इसका जवाब नहीं दिया जा सकता है जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट लिखा है कि शिक्षामित्र पैरा टीचर हैं या गोलमाल समझ में नहीं आ रहा

सुप्रीम कोर्ट के आदेश को न्यूट्रलाइज करने का पावर या तो संसद को है या तो अध्यादेश लाकर के केंद्र सरकार को है परंतु उत्तर प्रदेश सरकार ने एक ही जजमेंट में b.ed को बहाल किया जबकि शिक्षामित्र निरस्त है यह कैसे है क्या या सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना नहीं है इसी पहेली का उत्तर ना तो मुख्यमंत्री जी दे रहे हैं ना सरकार के कोई अधिकारी दे रहे हैं और ना ही इस पर कुछ खुल करके बोल रहे हैं शिक्षामित्र प्रेम जिंदगी की लड़ाई लड़ते हुए आखिरी पायदान पर खड़ा है आखिर कहां गोलमाल है

इसी मामले पर सुनिए ये लाइव प्रोग्राम -

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