अपना एमपी गज्जब है... यहां मोटर साइकिल ट्रक से ज्यादा माल ढोती है..

Update: 2022-09-10 11:16 GMT

अरुण दीक्षित

आप यकीन करें या न करें लेकिन ऐसा हुआ है।मध्यप्रदेश में मोटर साइकिल ट्रक का काम करती है ।यहां कुछ कारखाने बिना बिजली के ही चलते हैं।यही नहीं वे क्षमता से ज्यादा उत्पादन करते हैं।और तो और मध्यप्रदेश सरकार के आला अफसर 9 हजार गरीब लड़कियों की जगह 36 लाख से भी ज्यादा लड़कियों को घर बैठे खाना खिला देते हैं।

चौंकिए मत!यह आरोप किसी सतर्क संगठन या विपक्षी दल के नहीं हैं।यह तथ्य तो मध्यप्रदेश के ऑडिटर जनरल (एजी) ने अपनी जांच में उजागर किए हैं।

एजी की रिपोर्ट ने जो सबसे आश्चर्यजनक खुलासा किया है, वह है मोटर साइकिलों के ट्रक बनने का।आपको याद होगा सत्तर के दशक में बजाज स्कूटर का एक विज्ञापन आता था!उसकी टैग लाइन थी~हमारा बजाज। उस विज्ञापन में बजाज स्कूटर पर पूरे परिवार को सफर करते दिखाया जाता था।बजाज कंपनी का यह दावा होता था कि उसका स्कूटर पूरे परिवार को एकसाथ सफर कराने में सक्षम है।

लेकिन महिला और बाल विकास विभाग के खाता बही की जांच करने के बाद एजी ने खुलासा किया है कि मध्यप्रदेश में मोटर साइकिलें ट्रक का काम कर रही हैं।यही नहीं ऑटो, कार और पानी ले जाने वाले टैंकर भी माल ढोने का काम करते हैं।

महिला और बाल विकास के अफसरों ने लाखों टन स्वास्थ्यवर्धक खाना गरीब बच्चियों और महिलाओं के घरों तक मोटर साइकिलों और अन्य निजी वाहनों से पहुंचाया है।

यह अलग बात है कि अभी तक मोटर साइकिल बनाने वाली किसी भी कंपनी ने बजाज की तरह अपनी मोटर साइकिलों का प्रचार नही किया है।वे तो सिर्फ ज्यादा से ज्यादा माइलेज देने का दावा करती रही हैं।ऐसा ही अन्य वाहनों के साथ है।लेकिन सरकारी अफसरों ने अपने रिकॉर्ड में करीब ग्यारह हजार पांच सौ मीट्रिक टन पोषण आहार इन्ही वाहनों से इधर से उधर करवा दिया।

यही नहीं अफसरों ने इस पोषण आहार की खरीद में भी कमाल किया है। एजी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 8 जिलों में गड़बड़ का खुलासा हुआ है।जिन कारखानों ने इस आहार का उत्पादन किया है उन्होंने अदृश्य शक्ति से अपनी मशीनें चलाईं।एक तो उन्होंने कागज पर जितना पोषण आहार तैयार किया उससे आधे की भी क्षमता उनके पास नही थी।जितनी बिजली उन्होंने खर्च की,अगर उसे भी आधार बना लें तो यह साफ हो जाता है कि जितना बताया जा रहा है उसका आधा माल ही बनाया जा सकता था।है न चमत्कार!कारखानों की मशीनें बिना बिजली चलीं।मोटर साइकिलें और ऑटो ट्रक बन गए।जिन गरीब बच्चियों और महिलाओं के घर पर यह स्वास्थ्य वर्धक खाना पहुंचाया जाना था उनकी संख्या में अप्रत्याशित ढंग से बढ़ गई।शिक्षा विभाग के मुताबिक बीच में स्कूली पढ़ाई छोड़ने वाली बच्चियों की संख्या पूरे प्रदेश में सिर्फ 9 हजार है।जबकि महिला और बाल विकास के अफसरों ने 36 लाख बच्चियों को स्वास्थ्य वर्धक खाना घर बैठे खिला दिया।

एजी के मुताबिक 2018 से 2021तक करीब 111 करोड़ रुपए का गोलमाल अफसरों ने किया है।

संयोग है कि इस समय महिला बाल विकास विभाग का जिम्मा खुद मुख्यमंत्री संभाल रहे हैं।उन्होंने अभी तक कुछ नही कहा है।लेकिन सरकार की ओर से सफाई आ गई है।कहा गया है कि क्लर्क की गलती की वजह से पोषण आहार ढोने वाले वाहनों के नंबरों में गलती हुई है।यह भी कहा है कि हमने खुद गड़बड़ी पकड़ी।इसके बाद 38 करोड़ का भुगतान रोका गया।

सरकार के प्रवक्ता और प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा तो एक कदम और आगे बढ़ गए हैं।उनका कहना है कि एजी की रिपोर्ट को अंतिम निर्णय बताना ठीक नही है।इसके बाद एक कमेटी अकाउंट सेक्शन की होती है।जो अंतिम निर्णय करती है।विधानसभा की लोकलेखा समिति में भी मामला जाता है। उस समिति में विपक्ष का भी सदस्य होता है।हमने देखा है कि समिति के सामने आने के बाद जांच के कई पैराग्राफ डिलीट भी होते हैं।

मतलब यह है कि आगे क्या हो सकता है वह मंत्री ने बता दिया है।

जैसा कि भ्रष्टाचार के हर मामले में होता है,विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है।बदले में भाजपा के प्रवक्ता कह रहे हैं कि सारा घपला तो कांग्रेस की 15 महीने की सरकार में हुआ था।उनके बीच जुबानी जंग जारी है।

वैसे यह जगजाहिर है कि महिला और बाल विकास विभाग अफसरों की "कमाई" बड़ा जरिया रहा है।जिला स्तर पर अफसरों के भृष्टाचार के किस्से अखबारों में सुर्खियां पाते रहे हैं।इस विभाग के छोटे अफसरों की शानोशौकत भी चर्चा में रही है।सरकार किसी भी दल की रही हो विभाग के उस्ताद अफसरों को सरंक्षण हमेशा मिलता रहा है।गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों और महिलाओं को सरकार द्वारा दिया जाने वाला पोषण आहार इनका "आहार" बनता रहा है। बन रहा है।शायद बनता भी रहेगा।

ऐसा नही है कि पिछले सालों में यह पहला घोटाला है।प्रदेश के व्यापम घोटाले की चर्चा पूरी दुनियां में हुई थी।करीब 50 लोगों की मौत हुई थी।इस पर फिल्में भी बनी हैं।इसकी जांच सीबीआई कर रही है।बहुत से आरोपी जेल में हैं।लेकिन एक भी बड़ा आदमी सजा नही पाया है।

खनन घोटाला भी लगातार चर्चा में बना हुआ है।पिछले दिनों नर्सिंग कालेज घोटाला भी सामने आया है।सिंचाई विभाग का ताजा बना बांध भी अभी कुछ दिन पहले ही टूटा था।

उसकी भी जांच आयोग कर रहा है।

वैसे देखें तो घोटालों की लंबी फेरहिस्त है।लेकिन ज्यादातर मामलों में बात जांच तक जाकर ही खत्म हो जाती है।

सबसे मजेदार घोटाला मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में हुआ था।वह भी मुख्यमंत्री के अपने जिले विदिशा की सिरोंज तहसील में।गरीब कन्याओं के लिए सरकारी खजाने से दिया गया पैसा नेताओं अफसरों और दलालों के खातों में चला गया था।इस घोटाले में मुख्य आरोपी अफसर जेल में बंद है।उसका दुख यह है कि लूट के माल में हिस्सा सबने लिया।लेकिन जेल अकेले उसके ही हिस्से में आई।बड़े बड़े नामों की सूची उसके पास है।उसे यह डर भी है कि कहीं जेल में ही उसकी जान न चली जाए।

इतना होने के बाद भी खुद को प्रदेश के बच्चों का "मामा" बताने वाले बोलने को तैयार नहीं है।है न अपना एमपी गज्ज़ब!यहां मामा के राज में भांजियों का भोजन लुट रहा है।पर मामा मौन हैं।जिस पर सबकी नजर है।

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