पीयूष गोयल की पथरी और भाजपा का खजाना, अब मत कहना कि ये वंशवाद है!

Update: 2020-10-18 08:15 GMT

संजय कुमार सिंह 

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल अभी भी कई मंत्रालय देखते हैं। राम विलास पासवान के निधन के बाद उन्हें उनके मंत्रालयों का कार्यवाहक मंत्री बनाया गया है। पहले से वे रेल मंत्रालय के साथ वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय भी देखते थे। पिछले दिनों उन्होंने ट्वीट कर बताया कि पथरी का ऑपरेशन कराने के लिए वे कुछ दिन छुट्टी पर रहेंगे। मंत्रालयों का जो होना होगा होगा पर हर मंत्रालय को संभाल सकने वाले मंत्री का बीमार होना इस मुश्किल समय में अलग चिन्ता का विषय है। असल में पीयूष गोयल केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने से पहले भाजपा के कोषाध्यक्ष भी थे। बीमार होने की खबर के बाद मुझे भाजपा के खजाने की भी चिन्ता हुई।

पता चला कि संघठन के पिछले फेरबदल में उत्तर प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल को छह साल खाली रहे भाजपा के कोषाध्यक्ष का पद सौंप दिया गया है। मध्य प्रदेश के सांसद सुधीर गुप्ता को संयुक्त कोषाध्यक्ष बनाया गया है। इससे पहले पीयूष गोयल इस पद पर थे और 3 सितंबर 2017 को जब सुरेश प्रभु की जगह उन्हें रेल मंत्री बनाया गया तो पता चला कि वे भाजपा के कोषाध्यक्ष भी थे। केंद्रीय मंत्रिमंडल में उन्हें 2014 में ही शामिल कर लिया गया था और भाजपा कोषाध्यक्ष का पद मई 2014 से खाली था जो अब भरा है। संयुक्त कोषाध्यक्ष के साथ।

इस तरह, दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी, सबसे ज्यादा पैसे कमाने के बावजूद वर्षों बिना घोषित कोषाध्यक्ष के रही। दो तो छोड़िए, एक भी नहीं और चुनाव आयोग ने भी नहीं पूछा या जानने की जरूरत नहीं समझी। पीयूष गोयल के पिता केंद्रीय मंत्री थे और मां तीन बार विधायक रह चुकी हैं। पर यहां वंशवाद का कोई मामला नहीं है। वे अपनी योग्यता से सबसे कमाऊ मंत्रालय (यों) और कोषाध्यक्ष का पद (अघोषित रूप से) एक साथ सुशोभित करते रहे हैं। दूसरी बार मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने पर इकनोमिक टाइम्स ने लिखा था, कोयला, ऊर्जा, रेल और वित्त मंत्री रह चुके पीयूष गोयल (54) का जोरदार विकास हुआ है। उन्हें उनके कॉरपोरेट नेटवर्क के लिए जाना जाता है जिसे उन्होंने निवेश बैंकर के रूप में तैयार किया था।

पार्टी के लिए संसाधन जुटाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। कहने की जरूरत नहीं है कि इसमें उनका मंत्री होना भी असरकारक रहा होगा पर वे रणनीति निर्माताओं में रहे हैं। दूसरी पीढ़ी के भाजपाई हैं। नरेन्द्र मोदी और अमित शाह दोनों के खास माने जाते हैं। मंत्री बनने के बाद एक निजी कंपनी के शेयर एक मशहूर कारोबारी को उसके वास्तविक मूल्य (फेस वैल्यू) के मुकाबले 1,000 गुना पर बेचने का आरोप है। लेकिन भाजपा में यह सब भ्रष्टाचार माना ही नहीं जाता है और पार्टी आरोपों को गलत बता चुकी है। सवाल जवाब होते नहीं है। जो कहा गया वह छप गया। इसलिए बात खत्म।

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