कविता -

पढिए, माँ पर कविता ..

Update: 2021-07-03 08:08 GMT

🍁लेती नहीं दवाई "माँ",

जोड़े पाई-पाई "माँ"👸

🍁दुःख थे पर्वत, राई "माँ",

हारी नहीं लड़ाई "माँ"👸

🍁इस दुनियां में सब मैले हैं,

किस दुनियां से आई "माँ"👸

🍁दुनिया के सब रिश्ते ठंडे,

गरमागर्म रजाई "माँ" 💫👸

🍁जब भी कोई रिश्ता उधड़े,

करती है तुरपाई "माँ" 💫👸

🍁बाबू जी तनख़ा लाये बस,

लेकिन बरक़त लाई "माँ" 👸

🍁बाबूजी थे सख्त मगर ,

माखन और मलाई "माँ"👸

🍁बाबूजी के पाँव दबा कर

सब तीरथ हो आई "माँ"👸

🍁नाम सभी हैं गुड़ से मीठे,

मां जी, मैया, माई, "माँ" 👸

🍁सभी साड़ियाँ छीज गई थीं,

मगर नहीं कह पाई "माँ" 🥺

🍁घर में चूल्हे मत बाँटो रे,

देती रही दुहाई "माँ" 🥺

🍁बाबूजी बीमार पड़े जब,

साथ-साथ मुरझाई "माँ" 🥺

🍁रोती है लेकिन छुप-छुप कर,

बड़े सब्र की जाई "माँ"।🥺

🍁लड़ते-लड़ते, सहते-सहते,

रह गई एक तिहाई "माँ" 🥺

🍁बेटी रहे ससुराल में खुश,

सब ज़ेवर दे आई "माँ"।🥺

🍁"माँ" से घर, घर लगता है,

घर में घुली, समाई "माँ" 👸

🍁बेटे की कुर्सी है ऊँची,

पर उसकी ऊँचाई "माँ"👸

🍁दर्द बड़ा हो या छोटा हो,

याद हमेशा आई "माँ"।🥺

🍁घर के शगुन सभी "माँ" से,

है घर की शहनाई "माँ"💫👸

🍁सभी पराये हो जाते हैं,

होती नहीं पराईll "माँ" 👸

 - विनोद जैन 

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