बासी खबर को इतनी प्रमुखता क्यों : पत्रकारिता के सवाल

पाकिस्तान को लेकर मुखर रहने वाली भारतीय सेना चीन पर चुप क्यों रहती है?;

Update: 2020-06-14 11:40 GMT

संजय कुमार सिंह 

आज के अखबारों में खबर है कि भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर स्थिति नियंत्रण में है और ऐसा सेना प्रमुख ने कहा है। पर सवाल है कि सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने ऐसा कहां किससे कब किस संदर्भ में कहा। आप जानते हैं कि कुछ भी विवादास्पद कह जाने की स्थिति में आम तौर पर नेताओं का बचाव होता है कि उन्हें संदर्भ से हटकर कोट किया गया है। उन्हें गलत समझा गया आदि आदि। इसलिए यह बताया जाना चाहिए कि जिसे कोट किया जा रहा है उसने जो बात कही वह कहां किस संदर्भ में किससे कही।

कुछ ही दिन पहले अखबारों में सूत्रों के हवाले से खबर थी, "रंग लाई भारतीय कूटनीति, पूर्वी लद्दाख में कई जगहों से ढाई किलोमीटर पीछे हटा चीन। पूर्वी लद्दाख एलएसी पर जारी गतिरोध को खत्‍म करने के लिए भारतीय कूटनीति का बड़ा असर सामने आया है। पूर्वी लद्दाख में चीन के सैनिकों ने कई बिंदुओं को छोड़ा है। सरकार के शीर्ष सूत्रों ने बताया कि गलवन क्षेत्र में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी पीएलए ने पैट्रोलिंग प्वाइंट 15 और हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र से ढाई किलोमीटर पीछे हटी है जबकि भारत ने अपने सैनिकों को कुछ पीछे हटाया है। (दैनिक जागरण)

इस लिहाज से आज की खबर में कुछ नया नहीं है ना ही ज्यादा महत्वपूर्ण। फिर भी इसे कई अखबारों में प्रमुखता से छापा गया है। आप जानते हैं कि चीन का मामला बिल्कुल अलग ढंग से हैंडल किया जा रहा है। इस बारे में पूर्व वित्त और गृह मंत्री, कांग्रेस नेता पी चिदंबरम में ने आज अपने साप्ताहिक कॉलम में लिखा है, पहली बार ऐसा हुआ है जब दोनों ओर से सैन्य जनरलों की अगुआई में वार्ता हुईं। अब तक ये वातार्एं दोनों देशों के विदेश सेवाओं के राजनयिकों या विशेष प्रतिनिधियों के बीच हुआ करती थीं। ऐसे में रक्षा मंत्री जब विपक्ष के एक बड़े नेता के ट्वीट के जवाब में कह चुके हैं कि वे ससंद में जानकारी देंगे, अखबार सूत्रों के हवाले से जो खबर छाप चुके हैं लगभग वही बात आज (इतवार होना भी खास ही है) सेना प्रमुख के हवाले से क्यों छपी है? अखबार जब एक्सक्लूसिव खबरें नहीं के बराबर छापते हैं तो सरकारी खबर किसलिए? वह भी इतनी प्रमुखता से।

इंटरनेट पर नवभारत टाइम्स की यह खबर देहरादून डेटलाइन से है और हिन्दू में नई दिल्ली डेटलाइन से। अब आप कैसे समझेंगे कि सेना प्रमुख ने यह बात कहां किस संदर्भ में कही? नवभारत टाइम्स ने लिखा है, दोनों देशों की सीमा पर स्थितियां पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। क्या पहले विस्फोटक थी? गोलियां चल रही थीं? युद्ध छिड़ जाने का खतरा था। मैं नहीं समझता कि ऐसी कोई खबर थी। फिर नियंत्रण में है का क्या मतलब? वहीं नेपाल के साथ शुरू हुए सीमा विवाद पर बोलते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत भौगोलिक सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध हैं, जो आगे भी जारी रहेंगे। मुझे इस खबर का भी कोई मतलब नहीं समझ में आया पर मैं अभी चीन की ही बात करूंगा।

सेना प्रमुख के जवाब को क्या आप बीबीसी की खबर से जोड़कर देखेंगे? 12 जून की बीबीसी की खबर है, भारत-चीन सीमा विवाद: पाकिस्तान को लेकर मुखर रहने वाली भारतीय सेना चीन पर चुप क्यों रहती है? क्या आज का यह जवाब मुखर होना है? मुझे लगता है भारतीय मीडिया के कारण देश की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छवि खराब हो रही है और इस मामले में शीघ्र कुछ किया जाना चाहिए। बीबीसी की खबर में कहा गया था, भारत के पूर्व सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह ने बीबीसी से कहा है कि भारतीय सेना चीन के साथ लगी सीमा यानी लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर चीनी सेना को जैसे को तैसे जवाब दे सकती है और वो ऐसा करने में सक्षम है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की कार्रवाई के लिए सेना फ़ैसला नहीं करती है बल्कि राजनीतिक नेतृत्व को करना होता है।

हिन्दू की खबर में जो बात चौथे पैरे के आखिर में कही गई है वह इंडियन एक्सप्रेस में डेटलाइन से ही समझ में आ जाती है। एक्सप्रेस में इस खबर पर कृष्ण कौशिक की बाईलाइन है पर डेटलाइन दिल्ली ही है, देहरादून नहीं। विस्तार वही है, इंडियन मिलिट्री ऐकेडमी (देहरादून) में पासिंग आउट परेड में भाग लेने के बाद वे यहां पत्रकारों से बात कर रहे थे। हिन्दुस्तान टाइम्स में भी यह खबर पहले पन्ने पर बाईलाइन है। दो डेटलाइन दो बाईलाइन। इससे बात समझ में आती है।

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