बांके बिहारी मंदिर में शुरू हुई हिंडोला उत्सव की तैयारी, 18 करोड़ के स्वर्ण रजत हिंडोले में विराजेंगे ठाकुर जी

हिंडोला उत्सव के रूप में मनाए जाने वाले इस पर्व के मौके पर ठाकुर बांकेबिहारी महाराज स्वर्ण-रजत से निर्मित हिंडोले में झूला झूलते हैं।

Update: 2022-07-30 15:29 GMT

मथुरा : धर्म नगरी वृंदावन में हरियाली तीज पर्व की धूम मची हुई है। वहीं श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र जग प्रसिद्ध ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में हिंडोला उत्सव को लेकर विशेष तैयारी की जा रही हैं। आपको बता दें कि ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में कुछ विशेष उत्सव ऐसे भी मनाए जाते हैं। जिनका लाभ भक्तों को वर्षभर में केवल एक बार ही होने के कारण मंदिर में अपार जनसैलाब उमड़ता है। ऐसा ही एक पर्व है हरियाली तीज।

हिंडोला उत्सव के रूप में मनाए जाने वाले इस पर्व के मौके पर ठाकुर बांकेबिहारी महाराज स्वर्ण-रजत से निर्मित हिंडोले में झूला झूलते हैं। वर्ष में केवल एक बार हरियाली तीज के दिन ही हिंडोले में विराजमान ठाकुरजी के दर्शनों को स्थानीय एवं आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों सहित देश-विदेश के श्रद्धालु भक्तों का सैलाब उमड़ता है।

श्रीबांकेबिहारी मंदिर के पुजारी नितिन सांवरिया गोस्वामी ने बताया कि 18 करोड़ के इस हिंडोले में 2200 तोला सोना और एक लाख तोला चांदी लगी है जिसकी 30 फुट ऊचांई है और 7 फुट चौड़ाई है। हिंडोला के निर्माण में 70 वर्ष पूर्व ₹30 लाख रुपये की लागत आई थी। नेपाल के टनकपुर से हिंडोले के लिए लकड़ी लाई गई थी। 15-8-1947 को पहली बार हिंडोले में बांकेबिहारी ने दर्शन दिए थे। बांकेबिहारी के दर्शन हेतु मंदिर में गेट 2 एवं 3 से प्रवेश होगा और गेट 1 एवं 4 से निकास होगा। 

ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में 31 जुलाई को आयोजित हिंडोला उत्सव में उमड़ने वाली भक्तों की भीड़ की सुविधा के लिए जहां प्रशासन द्वारा सुरक्षा व यातायात आदि की व्यवस्था की गई है। वहीं मंदिर प्रबंधन द्वारा भी विशेष योजना तैयार की गई है। जहां दर्शनार्थियों के लिए प्रवेश व निकास द्वार अलग-अलग रखने के साथ ही सुरक्षा की दृष्टि से पुलिसबल के अलावा निजी सुरक्षा गार्ड एवं सीसीटीवी कैमरे की निगरानी रहेगी। वहीं मंदिर में हिंडोला सजाए जाने की तैयारी तेज कर दी गई है।

ठाकुरजी के अनन्य भक्त सेठ हरगुलाल बेरीवाला परिवार के सदस्य एवं बनारस से आए कारीगर हिंडोला को लगाने में जुट गए हैं। मंदिर के आंगन में तख्त लगाकर उस पर साइड के पिलर लगाए जा रहे हैं। साथ ही जरी वर्क एवं रत्न जड़ित कपड़ा लगाया जा रहा है। वहीं मंदिर परिसर में हिंडोला के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने का काम भी किया जा रहा है। जिसे 30 जुलाई की रात्रि को स्थापित किया जाएगा।

31 जुलाई को ठाकुर बांकेबिहारी जी इस हिंडोला में विराजमान होकर प्रातः पौने आठ बजे से मध्यान्ह 2 बजे तक और शाम को 5 बजे से रात्रि 11 बजे तक भक्तों को दर्शन देंगे। मंदिर के सेवायत शुभम गोस्वामी ने बताया कि ठाकुर बांकेबिहारी महाराज का हरे रंग की पोशाक और सवर्ण-रजत आभूषणों से भव्य श्रृंगार करने के बाद उन्हें हिंडोले में विराजमान कराया जाता है। साथ ही पर्व के अनुरूप ही उन्हें भोग प्रसादी अर्पण की जाती है।

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