UP की 11 राज्यसभा सीट के लिए 10 जून को चुनाव, BJP की 7 सीट पक्की, जानें कैसे बना जीत का समीकरण

Update: 2022-05-12 11:59 GMT

उत्तर प्रदेश से जुलाई में खाली हो रहे 11 राज्यसभा सदस्यों के पद के लिए चुनाव 10 जून को होगा। राज्यसभा में उत्तर प्रदेश से 31 सदस्य जाते हैं। भारतीय जनता पार्टी के पांच, समाजवादी पार्टी के तीन, बहुजन समाज पार्टी के दो तथा कांग्रेस के एक राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल समाप्त होने पर यह चुनाव हो रहे हैं। 

 राज्‍यसभा के हर सदस्‍य का कार्यकाल 6 साल का होता है। लोकसभा सांसद चुनने के लिए जनता सीधे वोट डालती है लेकिन राज्‍यसभा सांसद का चुनाव, जनता की ओर से चुने गए विधायक और इलेक्‍टोरल कॉलेज के मतों से होता है। संविधान के अनुसार राज्‍यसभा में अधिकतम 250 सदस्‍य हो सकते हैं जिनमें से 238 का चुनाव होता है और बाकी 12 राष्‍ट्रपति की ओर से नामित किए जाते हैं। 

11 में से भाजपा की सात सीट पक्की : प्रदेश विधानसभा में 403 विधायक में भाजपा गठबंधन के पास 273 विधायक हैं। मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगी दलों के विधायकों की कुल संख्या 125 बनती है। जुलाई में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के जो 11 सीटें खाली हो रही हैं, उसमें से प्रत्यके सीट के लिए कम से कम 37 विधायकों का वोट चाहिए। इस हिसाब से भाजपा गठबंधन सात सीटों पर आसानी से जीत दर्ज कर सकता है और तीन सीटों पर सपा गठबंधन की जीत पक्की लग रही है। असल मुकाबला 11वीं सीट के लिए होना है, जिसके लिए दोनों ही गठबंधन को बाकी दलों का समर्थन चाहिए। 11वीं सीट पर किसका पलड़ा भारी।

यूपी से राज्यसभा की 11वीं सीट पर किसी भी उम्मीदवार की जीत के लिए कांग्रेस, राजा भैया की जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) और बसपा की भूमिका अहम हो जाएगी। कांग्रेस के दो, जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के दो और बीएसपी के एक विधायक हैं। इनमें से सपा के कांग्रेस से समर्थन मिलना लगभग तय लग रहा है। इसी तरह राजा भैया की चुनावों से पहले जिस तरह से सपा चीफ अखिलेश यादव से तल्खी बढ़ी थी तो वह भाजपा गठबंधन के साथ जा सकते है। बसपा के बारे में फिलहाल कोई भी अटकल लगाना मुश्किल है। भाजपा गठबंधन के पास सात उम्मीदवारों को वोट देने के बाद 24 अतिरिक्त वोट बचेंगे और सपा गठबंधन के पास 19 अतिरिक्त वोट। मौजूदा गुना-गणित के हिसाब से 11वीं सीट पर भी सत्ताधारी गठबंधन का पलड़ा भारी पड़ सकता है।

इनका पूरा हो रहा है कार्यकाल : भाजपा के मुस्लिम चेहरे जफर इस्लाम, शिव प्रताप शुक्ला, संजय सेठ, सुरेन्द्र नागर और जय प्रकाश निषाद। सपा से कार्यकाल पूरा करने वालों में सुखराम सिंह यादव, रेवती रमण सिंह, विषंभर प्रसाद निषाद। सुखराम सिंह यादव के बेटे मोहित यादव हाल ही में भाजपा में शामिल हो चुके हैं। बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा और अशोक सिद्धार्थ तथा कांग्रेस के कपिल सिब्बल।

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