चंपत राय ने बताया समय, अयोध्या में बन रहे नए राम मंदिर में कब विराजमान होंगे रामलला?

Update: 2022-01-23 04:57 GMT

विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने परिक्रमा मार्ग स्थित श्री कृष्ण कृपा धाम आश्रम में पत्रकारों से रुबरु होते हुए राम मंदिर निर्माण की प्रगति की जानकारी दी। बताया कि राम मंदिर का निर्माण दिसंबर 2023 तक पूरा हो जाएगा और रामलला को नव निर्मित मंदिर में विराजमान करा दिया जाएगा। यह मंदिर राष्ट्र में परिवर्तन लाने वाला होगा। इससे पूरे विश्व में भारत के प्रति सोचने की दृष्टि बदली है।

चंपत राय ने बताया कि अयोध्या में चल रहे राम मंदिर निर्माण की प्रगति और वर्तमान स्थिति की जानकारी देने के लिये विश्व हिंदू परिषद संतों और धर्मचार्यों से मुलाकात कर रही है। वे नवंबर 2021 से देश और प्रदेश के संतों से व्यक्तिगत और सामूहिक मुलाकात कर रहे हैं। वृंदावन आने से पहले वह वाराणसी, अयोध्या, नैमिषारण्य, बिठूर, सूकर क्षेत्र सोरों आदि स्थानों पर जा कर मुलाकात कर चुके हैं। 3 फरवरी को प्रयागराज में चल रहे माघ मेला में भी वह संतों से मिलेंगे। कहा कि वे सभी संत-महात्माओं को अयोध्या आकर निर्माण की प्रगति देखने को आमंत्रित भी कर रहे हैं।

नींव बनाने का काम पूरा

बताया कि अभी रामलला वह लकड़ी के मंदिर में हैं और 28 वर्ष तक टेंट में रहे थे। मंदिर के नींव बनाने का काम शनिवार को पूरा हो गया। मंदिर में नींव 12 मीटर गहरी है जबकि गर्भ गृह में 14 मीटर चट्टान रुपी नींव में लोहे के एक तार का भी प्रयोग नहीं किया गया। इस नींव के निर्माण में सीमेंट का भी प्रयोग बहुत कम किया है। इसमें आईआईटी मद्रास द्वारा तैयार कराए गए मिश्रण का प्रयोग किया है। इसमें 98 प्रतिशत घनत्व पर कंक्रीट डाली है। इसमें 1-1 मीटर पर लेयर हैं। गर्भगृह में 56 व बाहर 48 लेयर हैं। यह काम 9 महीने में पूरा हुआ।

उन्होंने बताया कि अगले सप्ताह से प्लिंथ (फर्श) ऊंचा करने का काम शुरू हो जाएगा। फर्श ऊंचा करने के लिए ग्रेनाइट पत्थर के 5x3x2.5 फुट के 17 हजार ब्लॉक लगाए जाएंगे। यह फर्श करीब साढ़े 6 मीटर ऊंचा उठाया जाएगा। 6 महीने में यह काम पूरा होने के बाद जून से मंदिर निर्माण का काम शुरू हो जाएगा। बताया कि यात्री सुविधाओं सहित 18 एकड़ में मन्दिर का क्षेत्रफल होगा। 2.75 एकड़ में मंदिर का निर्माण होगा। इसके बाद साढ़े 6 एकड़ जमीन को कवर करते हुए 9 मीटर ऊंची दीवार (परकोटा) बनाया जाएगा। यह भविष्य में कभी आने वाले भूकम्प और जल प्रलय को देखते हुए बनाई जा रही है। पूरे मंदिर निर्माण में 17 लाख घन फीट पत्थर लगेगा। इसमें ग्रेनाइट कर्नाटक से, मंदिर का पत्थर बंशी पहाड़पुर (बयाना) से और मकराने की चौखट लगेंगी। जबकि परकोटा का पत्थर जोधपुर से मंगाए जाने पर विचार चल रहा है। बताया कि मंदिर में एक दिन में 50 हजार दर्शनार्थियों के पहुंचने की संभावना है। वहीं त्योहार के दिनों में 2 से 2.5 लाख तक लोग आ सकते हैं। विहिप नेता ने बताया कि मंदिर निर्माण में यात्रियों की भविष्य में आने वाली संख्या का ख्याल रखा जा रहा है।

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