अवैध खनन व परिवहन से क्षेत्र की सड़कें खस्ताहाल, खदानों में अराजकता चरम पर

Update: 2022-02-03 08:14 GMT

- रात भर खदानों में एनजीटी के नियमो की धज्जियां उड़ाकर दहाड़ रहीं हैवी मशीने

- कहीं जलधारा बांधकर तो कहीं पट्टा क्षेत्र से हटकर खोद रहे खनिज संपदा

- खनन क्षेत्रो के गांवो का भी विकास की जगह हुआ विनाश

- जनप्रतिनिधियो ने भी खूब चाटी खनन की मलाई

- किसी ने 5 ट्रक प्रतिदिन तो किसी ने ली लाखों की महीनवारी

- ओवरलोड़ के नाम पर ही हुई वसूली, खाकी व सचल दल ने भी खूब भुनाया मौका

- रात भर जेब मजबूत करने के लिए सक्रिय रहती कई थाना व चौकियों की खाकी 👉

( विवेक मिश्र )

वैसे तो नदियां धरती को खूबसूरत बनाती हैं मगर जनपद की दक्षिणी सीमा से सटा ललौली खनन क्षेत्र व किशनपुर खनन क्षेत्र दशकों से खनन माफियाओं की पहली पसंद बना हुआ है। सरकार बदल गई, राज बदल गया, निजाम बदल गए, फरमान बदल गए लेकिन नहीं बदला तो इन क्षेत्रों का अवैध खनन। इन क्षेत्रों से अरबो रुपये कमाने वाली सरकारों ने इन क्षेत्रों को विकास के नाम पर सिर्फ छला है। कहने को तो इन क्षेत्रों के विकास के लिए डीएमएफ में करोड़ो की धनराशि आती है मगर वह धनराशि मनमाने ढंग से अफसर अन्यत्र कहीं खर्च कर देते हैं। शायद ही छिटपुट विकास कार्य इस मद से खनन क्षेत्रो के विकास के लिए हुए हों। जनप्रतिनिधि भी चुनाव जीतने से पूर्व बड़े बड़े वादे करते हैं मगर जनता की मूलभूत समस्याओ के निवारण में भी नाकाम रहते हैं। तभी तो विधानसभा अयाह शाह व विधानसभा खागा से जुड़ी खनन क्षेत्रों की दर्जनों सड़कें पैदल चलने लायक भी नहीं बची हैं। खनन मार्ग सामान्य सी बारिश में दलदल में तब्दील हो जाते हैं। इन क्षेत्रों से जुड़े हुए सैकड़ो गांवो के लोग विकास की बाट आज भी जोह रहे हैं। उनके लिए बेहतर आवागमन का सपना स्वप्न बनकर ही रह गया है।

बता दें कि वर्तमान समय में ललौली क्षेत्र में अढ़ावल एक व पांच, कम्पोजिट वन व टू, कोर्रा व ओती कम्पोजिट खदाने चल रही हैं। इसी तरह किशनपुर क्षेत्र में संगोलीपुर व गुरवल संचालित हैं। यमुना नदी में हो रहे वैध/अवैध खनन से हुई दुर्दशा की गवाही यमुना नदी व नदी से जुड़ा हुए ये क्षेत्र खुद ही चीख-चीखकर अपनी कहानी बयां कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में पूर्व में भी सिंडिकेट के नाम पर जमकर लूट हुई थी और आज भी लूट बदस्तूर जारी है बदले हैं तो बस लूटने के तरीके। माफियाओं ने सारे नियम कायदों को ताक में रखकर प्रकृति का खजाना लूटा है। कहा जाये तो अवैध खनन के इस काले खेल में खाकी व क्षेत्रीय प्रशासन के हाथ भी काले हैं। क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन पर अफसर भी खूब मलाई चाट रहे हैं। परिवहन व ब्यवस्था से जुड़े अफसरों की जेबे भी रोज गर्म की जाती हैं, और फिर अफसर आंखों पर काली पट्टी बांध लेते हैं। उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता है, सब मौन हो जाते हैं। अवैध खनन कर ओवरलोड वाहनों की आवाजाही से खस्ताहाल यहां की सडके अपना दर्द स्वयं बयां कर रही हैं।

- खनन, परिवहन की मॉनिटरिंग हुई फेल

प्रदेश में जीरो टॉलरेंस के दम पर आई भाजपा की सरकार ने खनन में परिदर्शिता लाने के लिए खनिज नियमों में नए नए संशोधन किये। अवैध खनन में विराम लगाने के वास्ते खदानों में सीसीटीवी व धर्म कांटा भौतिक मूल्यांकन करने के लिए लगाया। लेकिन अवैध खनन में महारत हासिल माफियाओं ने एक कदम और आगे बढ़ा कर इसकी भी मास्टर चाभी तैयार कर ली। खनिज विभाग के सर्वर से अटैच कैमरे खदानों में बंद हैं या तो उनका डायरेक्शन बदला है। संचालकों ने खदानों पर लगे धर्मकाटो को छेड़छाड़ कर सेट रखा है। हालांकि खनिज अधिकारी ने शासन से कांटो की जांच कराने के लिए पूर्व में एक पत्र लिखा था लेकिन वह भी कागज तक ही सीमित रह गया।

- अवैध परिवहन रोकने को लगे सचल दल ने टेके घुटने

शासन के निर्देश पर ओवरलोड परिवहन को रोकने के लिए खनिज विभाग ने स्पेशल स्क्वायड को खनन क्षेत्रों में लगा रखा है। खनन क्षेत्रों में लगे सचल दल के जवानों के पास विभाग द्वारा ना तो सुरक्षा प्रदान की गई है, और ना ही मूलभूत सुविधाओं से लैस किया गया है। जिस कारण यह अपनी ड्यूटी की जद्दोजहद में ही पूरा समय खफा देते हैं। जिन गाड़ियों को सचल दल पकड़ भी लेता है। उन पर स्थानीय ढाबा संचालक परिवहन से जुड़े लोग इन पर हावी होकर नकेल कसने लगते हैं। जब तक सचल दल के जवान अपनी सुरक्षा की गुहार चौकी थाने से लगाते हैं। उससे पहले ही हावी होकर लोग उनके गिरफ्त से गाड़ियां लेकर नौ दो ग्यारह हो जाते हैं। वहीं रात में खाकी और सचल दल की चोर चोर मौसेरे भाई वाली कहावत चरितार्थ होती है, रात में अचानक धड़ल्ले से ओवरलोड़ वाहनों का संचालन शुरू हो जाता है। बताते हैं दोनो भाई आपस मे तालमेल बिठाकर वाहनों को पास कराते हैं।

- ओवरलोड परिवहन से बदरंग हुई सड़कें

लगातार हो रहे अवैध खनन व अवैध परिवहन से लोक निर्माण विभाग से बना अढ़ावल मार्ग पूर्णतया विलुप्त हो गया है। इस सड़क पर वाहनों के बिगड़ जाने से ज्यादातर जाम की स्थिति बनी रहती है। आये दिन ग्रामीणों को आवागमन की समस्या से दो चार होना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार यहां बीमार होने पर 108 एंबुलेंस को फोन करने पर वह समय से नहीं पहुंच पाती है। यह समस्या खदान के संपर्क मार्ग की ही नहीं अपितु हाईवे भी इन समस्याओं से अछूते नहीं हैं। बांदा टांडा हाइवे व कानपुर बांदा हाईवे कमोबेश दोनों की स्थिति खस्ताहाल हो गई है। इसी तरह किशनपुर क्षेत्र के संगोलीपुर व गुरवल खदानों के दर्जनों संपर्क मार्ग दलदल व गड्ढो से युक्त हैं जहां आये दिन हादसे होना आम बात है।

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